**अलका लांबा द्वारा अनिरुद्ध आचार्य जी को "कालिख पोतने" वाली टिप्पणी पर विवाद ...
जैसा कि आप लोग जानते हैं कि अनिरुद्ध आचार्य जी कुछ दिनों से विवादों से घिरे हुए हैं और उसके बीच में बहुत सारे ऐसी बातें बोल दिए हैं कई लोगों को बुरा लग रहा है कई लोग उसे चीज से नाराज नहीं है लेकिन ऐसी है एक कांग्रेस नेता की मंत्री जिसको बहुत ही बुरा लगा और कई कालिख पोतने की बात कह डाली चलिए जानते हैं
हाल ही में कांग्रेस नेता **अलका लांबा** ने एक सार्वजनिक बयान में **बागेश्वर धाम सरकार अनिरुद्ध आचार्य जी महाराज** को लेकर जो शब्द इस्तेमाल किए, वह विवादों में घिर गया है। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि "**ऐसे लोगों के चेहरे पर कालिख पोती जानी चाहिए**", जिससे उनके समर्थकों और धार्मिक संगठनों में भारी नाराजगी फैल गई।
# पूरा मामला – विस्तार से:
# 🗣️ **अलका लांबा का बयान:**
अलका लांबा ने एक टीवी डिबेट या मीडिया इंटरव्यू में **अनिरुद्ध आचार्य जी** के कुछ पुराने बयानों और उनकी गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए कहा:
> "जो व्यक्ति महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करता है, जो धर्म के नाम पर नफरत फैलाता है, ऐसे लोगों के चेहरे पर तो कालिख पोत देनी चाहिए।"
हालांकि उन्होंने नाम स्पष्ट नहीं लिया, लेकिन उनके इशारे को साफ तौर पर **अनिरुद्ध आचार्य जी** से जोड़कर देखा गया।
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# 😡 **भक्तों और साधुओं की प्रतिक्रिया:**
* अनिरुद्ध आचार्य जी के **समर्थकों ने इस टिप्पणी को अपमानजनक** बताया और कहा कि यह एक **सनातन धर्म के संत और प्रवक्ता का अपमान है**।
* सोशल मीडिया पर "#AlkaLambaMaafiMaango" जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
* कई जगह **एफआईआर दर्ज कराने की मांग** भी उठी।
#🏛️ **राजनीतिक प्रतिक्रिया:**
* भाजपा समेत अन्य हिन्दू संगठनों ने इस बयान की कड़ी निंदा की।
* उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के नेता लगातार **हिन्दू संतों और धर्मगुरुओं को अपमानित कर रहे हैं**।
# 🧘 **अनिरुद्ध आचार्य जी की प्रतिक्रिया:**
अब तक अनिरुद्ध आचार्य जी की ओर से इस बयान पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उनके प्रवचनों में वे अप्रत्यक्ष रूप से "धर्म विरोधी ताकतों" पर निशाना साधते रहे हैं।
#📝 **अलका लांबा की सफाई या माफ़ी?**
अब तक अलका लांबा ने इस पर कोई माफ़ी या सफाई सार्वजनिक रूप से नहीं दी है, लेकिन यदि दबाव बढ़ा तो पार्टी स्तर पर बयान आ सकता है।
**निष्कर्ष:**
अलका लांबा की "कालिख पोतने" वाली टिप्पणी ने एक धार्मिक और राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। इससे जुड़े लोग इसे **स्वतंत्र विचार** मान रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोग इसे **धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना** बता रहे हैं।
Disclaimer... यह जानकारी सोशल मीडिया से लिया गया है

