अनिरुद्ध आचार्य जी का विरोध होने पर आया बयान.
आप लोग अनिरुद्ध आचार्य जी का विरोध का वीडियो देखे होंगे या विरोध करते हुए लोगों को देखे होंगे आज वह सबको जो है नकारते हुए क्या बोलते हैं आप लोगों को हम दिखाने वाले हैं
आज उन्होंने सारी जो बातें थी सारी जो गलतियां या तो उन्होंने की थी सारी गलतियों पर पर्दा उठा रहे आज उठाते हैं तो चलिए आप लोगों को हम उसे टॉपिक पर लेकर चलते हैं,affiliates
अनिरुद्ध आचार्य का विरोधियों पर बयान.
हमने तो कहा कि सनातन को चरित्रवान होकर रहना हमारे सास्त्य सिखाते हैं कि इस तरह हो पुरुषों दोनों चरित्रवान हो यही बात हमने कहीं लेवन रहना गलत है लेवन रहना गलत है मतलब गलत तो उनसे पूछिए लेवन में रहने का सपोर्ट करते हैं ठीक ह करिए लेकिन क्या लिवन में रहने को आप सही मान रहे हैं फिर सारे लोग लिवन में रहेंगे फिर चरित्रवान बच्चे कैसे पैदा होंगे जब सब चरित्रहीन यदि लिवन में रहोगे आज इसके संग कल उसके संग परसों इसके संग तो जब चार लोगों के संग आप र चरित्री से ही गिर जाओगी तो बचेगा क्या? गाउं की भाषा है चरित्री हिनिता को मुँ मारना ही बोलते है चरित्री हिनिता को गाउं की भाषा में मुँ मारना बोलते है विरोध तो पूजे प्रयमानन जी कभी किया उन्होंने तो नहीं बोला था मुँ मारना विरोध त पूज़ प्रह्मानन जी के शब्दे तो खराब नहीं थे, उनका क्यों विरोध हुआ फिर? तो आप अपनी बात पर अटल रहेंगे? भाई अटल क्या? आप बताईए कि आप चाहते हैं कि समाज लेवन में रहना सीख जाए? फिर? आप खोद इसकी पक्षदर नहीं है? फिर? दुर्योधन नहीं समझता था तो क्या कृष्ण को भी दुर्योधन की तरह हो जाना चाहिए था अर्जुन को भी दुर्योधन की तरह हो जाना चाहिए था क्योंकि दुर्योधन नहीं समझ रहा है बई दुर्योधन नहीं समझ रहा है इसका मतलब यह नहीं कि हम दुर्योधन � हमने पुरुषों को बोला, इस्त्रियों को भी बोला, दोनों को बोला, अब पुरुषों का काट के इस्त्रियों का चलाया मेडिया ने, तो ये तो मेडिया की जिम्मेदारी थी न, क्या आपने आधी अधूरी बात चलाई, क्या मेडिया का ये धर्म है, क्या आप आधी बात � सब्सक्राइब करते हैं आपको पता होगा तो प्रश्नोत्री की बात नहीं थी यह प्रश्नोत्री की बात थी अब इसे भी पैब्यास पीट बोला जाए तो आप समझने को तैयार नहीं हो कोई बात तो हम कैसे समझाए फिर समझाया भी उसको जाए जो समझे समझे ने उसकी क्या समझाए

