दोस्त से लिया हुआ पैसा क्या कर्ज में आता है....
प्रेमानंद जी महाराज जी ने बहुत ही अच्छे तरीके से कर्ज के बारे में बताए हैं चलिए आप लोग को आज हम इस बारे में बताते हैं कर्ज जो है वह क्या चीज है और लेना चाहिए या नहीं लेना चाहिए सारा डिटेल्स आप लोगों को बताते हैं..
कर्जा क्या है ..
कर्ज वह है जो हम एक दूसरे से पैसे लेते हैं या कोई भी हो पैसे की बात नहीं है या हम एक दूसरे की हेल्प भी करते हैं तो वह एक कर्ज में माना जाएगा पैसे का जो हेल्प होता है अगर हम किसी से उधार ले रहे हैं तो वह जो है वह कर्ज में माना जाएगा अगर वह उधर जो है वह नहीं चुका पाते हैं तो जिंदगी में बहुत ही कष्ट दायक होता है...
दोस्त से लिया हुआ पैसा...
क्या दोस्त से लिया हुआ पैसा कर जान माना जाता है क्या अगर हम कहीं जा रहे हैं गाड़ी में पेट्रोल नहीं है या हम एक दो रुपए मांगते हैं अपने दोस्त से वह दे देता है तो वह चीज जो होती है वह दोस्त वगैरह में कभी तुम दे देते हो कभी वह दे देता है तो यह सब चीज चलती रहती है तो वह कर्ज में नहीं आता है कर्जा वह है जो कर्ज पैसे लेने के बाद तुम उसे चूकाओ ना दोस्त का जो कर्ज होता है वह कर्ज में नहीं आता है ऐसा कहना है प्रेमानंद जी महाराज जी का..
दोस्त अगर अमीर हो तब..
. दोस्त अगर अमीर हो तो भी कर्ज में नहीं आता है पर अगर हम कोई भी चीज कहीं जाते हैं अगर वह दोस्त हमें खिला देता है वह अपने सुखी के कारण ही दूसरों को खिला रहा है यह नहीं की मतलब हम कभी खिलाएं हैं तो वह खिला देता है हां ऐसा होता है कि हम कभी चाय पिला देते हैं तो वह कभी हमें कुछ खिला देता है तो यह सब क्या होता है कि चलता रहता है यह सब कर्ज में नहीं आता है.
कर्ज न चुकाने पर क्या होगा...
कर्ज को लेकर बहुत सारे अटकलें लगाई गई है बहुत सारे बातें हो गई है प्रेमानंद जी महाराज जी का कहना है कि अगर हम किसी अनजान से कुछ पैसे लेते हैं तो वह एक कर्ज माना जाएगा अगर हम दोस्त से लेते हैं तो वह कर्ज नहीं माना जाता है क्योंकि तुम भी कभी उसकी हेल्प करते हो तो वह चीज कर्ज में नहीं आती है किसी दूसरे अनजान व्यक्ति से आप पैसे लेते हो तो वह एक कर्ज माना जाता है अगर उसे आदमी से लिया हुआ कर्ज जो है वह आप नहीं चुका पाते हो अगर आपके पास समर्थ है तो चुकाने की आप जानबूझकर नहीं चूक हो तो कहीं ना कहीं वह चीज निकल जाती है कि किसी और को वह पैसे जो है दे देते हो

